राष्‍ट्रवादिता

स्वामी जी ने बड़ी महत्‍वपूर्ण बात कही थी, लेकिन भारत इसको रिपिट नहीं कर पाया। वो राष्‍ट्रवादी संत और विचारक की बात करते रहे , लेकिन राष्‍ट्रीयता और राष्‍ट्रवादी होने का अर्थ क्‍या है ? विवेकानंद जी का कहना ये था कि जो महान दान की परंपरा धर्म की रही है न, कि जो हमने पाया हम जाकर सामने वाले को थोड़ा दे देते हैं, जब हम बांटने लगते हैं, देने लगते हैं। विवेकानंद जी वही बात कह रहे हैं कि तुमने जो महान जीवन के आदर्शों से जो पाया समाज के बीच अगर थोड़ा बहुत दे दो तो तुम्‍हारी राष्‍ट्रीयता घटित हो गई, यही राष्‍ट्रवादिता है।
 
-विवेक जी "स्वामी विवेकानंद और भारत" व्याख्यान कार्यक्रम से

भारत के राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद से विवेक जी ने निमंत्रण पर मुलाक़ात की

राष्ट्रपति से विवेक जी की मुलाक़ात

यह चर्चा बंगलोर में वर्ष २००८ के मध्य में की गयी थी ।ये शब्द माननीय के द्वारा कार्यक्रम के दौरान बोले गए हैं, इन्हें जस का तस रखा गया है

राजनैतिक शून्‍यता

सबसे महत्वपूर्ण बात यह होती है कि जिनके जीवन में पवित्रता और शुद्धता है वहाँ से ही समर्पण,दान और सहभाजन शुरू होता है, इसलिए अक्षय तृतीया के दिन लोग कहा करते थे की पवित्रता को जीवन में प्रवेश कराएँ।

अक्षय तृतीया

माननीय विवेक जी का सन्देश कर्नाटक में लिए गए राष्ट्र विरोधी निर्णय पर

कर्नाटक के राष्ट्र विरोधी निर्णय पर