बिल्वाष्टक


Lord shiva of Krantipeeth

बिल्वाष्टक भारत का एक अति प्राचीन सूत्र है जो बिल्व पत्र का शिव पूजा विधान में उसके महत्व को बताता है , इस सूत्र के रचने वाले आदि शंकराचार्य थे ।

तीन बिल्व की पत्तियाँ श्री शिव के लिए महत्व की हैं, जंगल और जीवन से निकले श्री शिव के महात्म्य में बिल्व पत्तियाँ वैसे ही हैं जैसे हमारे जीवन के आयाम, आप कुछ भी अगर अर्पित ना कर सकते हों तब भी आप शिव के भक्त हो सकते हैं क्योंकि शिव जंगल में मौजूद बिल्व पत्तियों से भी प्रसन्न हो जाते हैं- विवेक जी

बिल्वाष्टकम का अनुवाद माननीय विवेक जी के अनुसार -


त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रियायुधम् ।

त्रिजन्मपापसंहारं एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥ १॥


Tridalam Trigunakaaram Trinethram Cha Triyayusham ।

Trijanma Papa Samharam Eka Bilwam Shivarpanam॥ 1॥

त्रिशाखैः बिल्वपत्रैश्च ह्यच्छिद्रैः कोमलैः शुभैः । शिवपूजां करिष्यामि ह्येकबिल्वं शिवार्पणम् ॥ २॥ Trishakhai Bilwapathraischa Hyachidrai Komalai Shubai। Shiva Poojam Karishyami, Eka Bilwam Shivarpanam ॥ 2॥


अखण्ड बिल्व पत्रेण पूजिते नन्दिकेश्वरे । शुद्ध्यन्ति सर्वपापेभ्यो ह्येकबिल्वं शिवार्पणम् ॥ ३॥


Aganda Bilwa Pathrena Poojithe Nandikeshware । Shudhyanthi Sarva Papebhyo, Eka Bilwam Shivarpanam॥3॥


शालिग्राम शिलामेकां विप्राणां जातु चार्पयेत् । सोमयज्ञ महापुण्यं एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥ ४॥ Salagrama Shilamekaam Vipranam Jatha Cha Arpayeth। Soma Yagna Maha Punyam, Eka Bilwam Shivarpanam॥4॥


दन्तिकोटि सहस्राणि वाजपेय शतानि च । कोटिकन्या महादानं एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥ ५॥ Dandi Koti Sahasrani Vajapeya Sathani Cha। Koti Kanya Maha Danam, Eka Bilwam Shivarpanam ।।5॥

लक्ष्म्यास्तनुत उत्पन्नं महादेवस्य च प्रियम् । बिल्ववृक्षं प्रयच्छामि ह्येकबिल्वं शिवार्पणम् ॥ ६॥ Lakshmyasthanutha Uthpannam Mahadevasya Cha Priyam। Bilwa Vruksham Prayachami, Eka Bilwam Shivarpanam ।।6।।



दर्शनं बिल्ववृक्षस्य स्पर्शनं पापनाशनम् । अघोरपापसंहारं एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥ ७॥

Darshanam Bilwa Vrukshasya, Sparsanam Papa Nasanam, Aghora Papa Samharam, Eka Bilwam Shivarpanam ॥7॥


काशीक्षेत्रनिवासं च कालभैरवदर्शनम् । प्रयागमाधवं दृष्ट्वा ह्येकबिल्वं शिवार्पणम् ॥ मूलतो ब्रह्मरूपाय मध्यतो विष्णुरूपिणे । अग्रतः शिवरूपाय ह्येकबिल्वं शिवार्पणम् ॥ ८॥ Kasi Kshethra Nivasam Cha Kala Bhairava Darshanam । Prayaga Madhavam Drushtwa, Eka Bilwam Shivarpanam।। Moolatho Brahma Roopaya, Madhyatho Vishnu Roopine। Agratha Shiva Roopaya, Eka Bilwam Shivarpanam।।8।।